
सराये है जिसे नादां मुसाफ़िर,
कभी दुनिया कभी घर बोलते हैं|
राजेश रेड्डी
A sky full of cotton beads like clouds

सराये है जिसे नादां मुसाफ़िर,
कभी दुनिया कभी घर बोलते हैं|
राजेश रेड्डी
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