एक बार फिर से मैं आज पटनावासी श्रेष्ठ कवि जो मेरे आदरणीय मित्र होने के अलावा अभिनेता एवं नेता श्री शत्रुघ्न सिन्हा जी के भी मित्र और पड़ौसी हैं, ऐसे श्री सत्यनारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| वे कवि सम्मेलनों का श्रेष्ठ और गरिमापूर्ण संचालन तो करते ही हैं, मुझे याद आता है कि एक बार जब हमारे एक आयोजन में संचालक की भूमिका का निर्वाह करते हुए उन्होंने अपना काव्य-पाठ किया था तब मंच पर उपस्थित नीरज जी, किशन सरोज जी और अन्य श्रेष्ठ कवियों ने उनके संचालन तथा उनके काव्य-पाठ की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी|
लीजिए प्रस्तुत है श्री सत्यनारायण जी का यह नवगीत जो आज की स्थितियों का सटीक चित्रण प्रस्तुत करता है –

इस मौसम में
कुछ ज़्यादा ही तनातनी है।
सच है स्याह
सफ़ेद झूठ
यह आखिर क्या है?
धर्मयुद्ध है
या जेहाद है
या फिर क्या है?
इतिहासों के
काले पन्ने खुलते जाते
नादिरशाहों
चंग़ेजों की चली बनी है!
रह-रह
बदल रहा है मौसम
दुर्घटना में,
लोग हस्तिनापुर में
हों या
हों पटना में,
पानीपत की आँखों में
अब भी दहशत है
और आज भी
नालन्दा में आग़जनी है।
घड़ियालों की
बन आई है
समय नदी में
नये-नये
हो रहे तमाशे
नई सदी में
लहजे बदले
इंद्रप्रस्थ में संवादों के
रंगमंच पर
फ़नकारों में ग़ज़ब ठनी है।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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