
ये लम्हा ज़ीस्त का बस आख़िरी है और मैं हूं,
हर एक सम्त से अब वापसी है और मैं हूं|
कृष्ण बिहारी ‘नूर’
A sky full of cotton beads like clouds

ये लम्हा ज़ीस्त का बस आख़िरी है और मैं हूं,
हर एक सम्त से अब वापसी है और मैं हूं|
कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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