आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बहुत सहज अंदाज़ में गहरी बात कह जाते थे|
लीजिए प्रस्तुत है भवानी दादा की यह कविता जो हमारे मन में बहुत सी बार पैदा होने वाले अपमान के भाव का सामना करने के बारे में कुछ सार्थक बात कहती है –

अपमान का
इतना असर
मत होने दो अपने ऊपर
सदा ही
और सबके आगे
कौन सम्मानित रहा है भू पर
मन से ज्यादा
तुम्हें कोई और नहीं जानता
उसी से पूछकर जानते रहो
उचित-अनुचित
क्या-कुछ
हो जाता है तुमसे
हाथ का काम छोड़कर
बैठ मत जाओ
ऐसे गुम-सुम से !
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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