किसी के बराबर नहीं रहा!

मुझ में ही कुछ कमी थी कि बेहतर मैं उनसे था,
मैं शहर में किसी के बराबर नहीं रहा|

मुनीर नियाज़ी

2 responses to “किसी के बराबर नहीं रहा!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji

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