कहीं तिश्नगी बेहिसाब है!

कहीं आँसुओं की है दास्ताँ, कहीं मुस्कुराहटों का बयाँ,
कहीं बर्क़तों की है बारिशें कहीं तिश्नगी बेहिसाब है|

राजेश रेड्डी

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