ये जो ज़िन्दगी की किताब है!

ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या किताब है|
कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब* है|

वेदना*

राजेश रेड्डी

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