
लेके अपनी-अपनी किस्मत आए थे गुलशन में गुल,
कुछ बहारों मे खिले और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए|
राजेश रेड्डी
A sky full of cotton beads like clouds

लेके अपनी-अपनी किस्मत आए थे गुलशन में गुल,
कुछ बहारों मे खिले और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए|
राजेश रेड्डी
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