अश्के-रवां में खो गए!

हसरतें जितनी भी थीं सब आह बनके उड़ गईं,
ख़्वाब जितने भी थे सब अश्के-रवां में खो गए|

राजेश रेड्डी

2 responses to “अश्के-रवां में खो गए!”

  1. वाह वाह।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      धन्यवाद जी।

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