ज़िन्दगी क़ैद है सीता की तरह!

अपने हाथों को पढ़ा करता हूँ
कभी क़ुरआँ कभी गीता की तरह,
चन्द रेखाओं में सीमाओं में
ज़िन्दगी क़ैद है सीता की तरह|

कैफ़ी आज़मी

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