एक आदत है जिए जाना भी!

नब्ज़ बुझती भी भड़कती भी है,
दिल का मामूल है घबराना भी,
रात अन्धेरे ने अन्धेरे से कहा,
एक आदत है जिए जाना भी|

कैफ़ी आज़मी

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