तुम जला दो आशियाँ मेरा!

सुकूँ पाएँ चमन वाले हर इक घर रोशनी पहुँचे,
मुझे अच्छा लगेगा तुम जला दो आशियाँ मेरा|

बेकल उत्साही

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