
इस इक नज़र के बज़्म में क़िस्से बने हज़ार,
उतना समझ सका जिसे जितना शुऊर था|
आनंद नारायण ‘मुल्ला’
A sky full of cotton beads like clouds

इस इक नज़र के बज़्म में क़िस्से बने हज़ार,
उतना समझ सका जिसे जितना शुऊर था|
आनंद नारायण ‘मुल्ला’
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