
न जलने पाते थे जिसके चूल्हे भी हर सवेरे,
सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds

न जलने पाते थे जिसके चूल्हे भी हर सवेरे,
सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है|
जावेद अख़्तर
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