
वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है,
ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds

वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है,
ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है|
जावेद अख़्तर
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