कभी जाम तक न पहुँचे!

मैं नज़र से पी रहा था कि ये दिल ने बददुआ दी,
तेरा हाथ ज़िंदगी-भर कभी जाम तक न पहुँचे।

शकील बदायूँनी

2 responses to “कभी जाम तक न पहुँचे!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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