
अपनी तारीख़-ए-मोहब्बत के वही हैं सुक़रात,
हँस के हर साँस पे जो ज़हर पिए जाते हैं|
शमीम जयपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

अपनी तारीख़-ए-मोहब्बत के वही हैं सुक़रात,
हँस के हर साँस पे जो ज़हर पिए जाते हैं|
शमीम जयपुरी
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