
आबगीनों की तरह दिल हैं ग़रीबों के ‘शमीम’ ,
टूट जाते हैं कभी तोड़ दिए जाते हैं|
शमीम जयपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

आबगीनों की तरह दिल हैं ग़रीबों के ‘शमीम’ ,
टूट जाते हैं कभी तोड़ दिए जाते हैं|
शमीम जयपुरी
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