
हम हैं एक शम्अ मगर देख के बुझते बुझते,
रौशनी कितने अँधेरों को दिए जाते हैं|
शमीम जयपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

हम हैं एक शम्अ मगर देख के बुझते बुझते,
रौशनी कितने अँधेरों को दिए जाते हैं|
शमीम जयपुरी
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