
जो हवा में घर बनाया काश कोई देखता,
दश्त में रहते थे पर तामीर की हसरत भी थी|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds

जो हवा में घर बनाया काश कोई देखता,
दश्त में रहते थे पर तामीर की हसरत भी थी|
मुनीर नियाज़ी
Leave a comment