
रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ,
रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है|
मुनव्वर राना
A sky full of cotton beads like clouds

रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ,
रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है|
मुनव्वर राना
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