
उन चराग़ों में तेल ही कम था,
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds

उन चराग़ों में तेल ही कम था,
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे|
जावेद अख़्तर
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