
तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से,
वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है|
राजेश रेड्डी
A sky full of cotton beads like clouds

तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से,
वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है|
राजेश रेड्डी
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