
कल शाम छत पे मीर-तक़ी-‘मीर’ की ग़ज़ल,
मैं गुनगुना रही थी कि तुम याद आ गए|
अंजुम रहबर
A sky full of cotton beads like clouds

कल शाम छत पे मीर-तक़ी-‘मीर’ की ग़ज़ल,
मैं गुनगुना रही थी कि तुम याद आ गए|
अंजुम रहबर
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