मद-मस्त पुरवाई सी तुम!

शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम,
ज़िंदगी है धूप, तो मद-मस्त पुरवाई सी तुम|

कुँअर बेचैन

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