जिनमें नींद ना आए!

क्‍या वो दिन भी दिन हैं, जिनमें दिन भर जी घबराए
क्‍या वो रातें भी रातें हैं जिनमें नींद ना आए।

राही मासूम रज़ा

2 responses to “जिनमें नींद ना आए!”

  1. बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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