
फिर नज़र में लहू के छींटे हैं,
तुम को शायद मुग़ालता है कोई|
गुलज़ार
A sky full of cotton beads like clouds

फिर नज़र में लहू के छींटे हैं,
तुम को शायद मुग़ालता है कोई|
गुलज़ार
Leave a comment