शुरुआत मेरी दास्तान की!

बुझ जाये सरे आम ही जैसे कोई चिराग,
कुछ यूँ है शुरुआत मेरी दास्तान की|

गोपालदास ‘नीरज’

2 responses to “शुरुआत मेरी दास्तान की!”

  1. वाह, बहुत खूब |

    Like

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

      Like

Leave a comment