
अभी बे-साया है दीवार कहीं लोच न ख़म,
कोई खिड़की कहीं निकले कहीं मेहराब लगे|
निदा फ़ाज़ली
A sky full of cotton beads like clouds

अभी बे-साया है दीवार कहीं लोच न ख़म,
कोई खिड़की कहीं निकले कहीं मेहराब लगे|
निदा फ़ाज़ली
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