
चांद को छूके चले आए हैं विज्ञान के पंख,
देखना ये है कि इन्सान कहाँ तक पहुंचे।
गोपालदास “नीरज”
A sky full of cotton beads like clouds

चांद को छूके चले आए हैं विज्ञान के पंख,
देखना ये है कि इन्सान कहाँ तक पहुंचे।
गोपालदास “नीरज”
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