
कौन बिछड़कर फिर लौटेगा, क्यों आवारा फिरते हो,
रातों को एक चांद मुझे समझाये भी घबराये भी|
मोहसिन नक़वी
A sky full of cotton beads like clouds

कौन बिछड़कर फिर लौटेगा, क्यों आवारा फिरते हो,
रातों को एक चांद मुझे समझाये भी घबराये भी|
मोहसिन नक़वी
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