गुलशन का कारोबार चले!

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,
चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

2 responses to “गुलशन का कारोबार चले!”

  1. वाह, बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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