
इक ये दिन जब जागी रातें दीवारों को तकती हैं,
इक वो दिन जब शामों की भी पलकें बोझल रहती थीं।
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds

इक ये दिन जब जागी रातें दीवारों को तकती हैं,
इक वो दिन जब शामों की भी पलकें बोझल रहती थीं।
जावेद अख़्तर
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