
मैं खुले दर के किसी घर का हूँ सामां प्यारे,
तू दबे पाँव कभी आ के चुरा ले मुझको|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

मैं खुले दर के किसी घर का हूँ सामां प्यारे,
तू दबे पाँव कभी आ के चुरा ले मुझको|
क़तील शिफ़ाई
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