
कहां तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए,
कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए|
दुष्यंत कुमार
A sky full of cotton beads like clouds

कहां तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए,
कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए|
दुष्यंत कुमार
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