फिर ज़मीं पर कहीं–

जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता है,
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है|

सुदर्शन फाक़िर

Leave a comment