अश्कों का समंदर क्यूँ है!

ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल ही नहीं अब “फ़ाकिर”
वर्ना हर आँख में अश्कों का समंदर क्यूँ है|

सुदर्शन फाक़िर

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