वो खत जो तुम्हें दे न सके–

अब भी किसी दराज में मिल जाएंगे तुम्हें,
वो खत जो तुम्हें दे न सके लिख लिखा लिए।

कुंवर बेचैन

2 responses to “वो खत जो तुम्हें दे न सके–”

  1. कुछ भावनाएं खतों में सिमट के रह जाती है उम्र भर

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      जी, सही कहा आपने।

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