
खून अपना हो या पराया हो
नस्ल-ए-आदम का खून है आख़िर,
जंग मशरिक में हो या मगरिब में ,
अमन-ऐ-आलम का खून है आख़िर !
साहिर लुधियानवी
A sky full of cotton beads like clouds

खून अपना हो या पराया हो
नस्ल-ए-आदम का खून है आख़िर,
जंग मशरिक में हो या मगरिब में ,
अमन-ऐ-आलम का खून है आख़िर !
साहिर लुधियानवी
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