
बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले,
ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता|
निदा फ़ाज़ली
A sky full of cotton beads like clouds

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले,
ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता|
निदा फ़ाज़ली
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