
शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा,
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है|
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
A sky full of cotton beads like clouds

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा,
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है|
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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