रुला के गया, सपना मेरा!



कल मैंने भारतीय सिनेमा जगत के दो महान व्यक्तित्वों – राज कपूर जी को उनके जन्म दिन पर और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया था|

कल मैंने राज साहब की फिल्म – ‘मेरा नाम जोकर’ का एक गीत भी उनकी स्मृति में शेयर किया था| आज मैं शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो उन्होंने देव आनंद जी की फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ के लिए लिखा था और इसे सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने गाया था| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल –


रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|

वही है गम-ए-दिल, वही हैं चन्दा तारे
वही हम बेसहारे
आधी रात वही हैं, और हर बात वही हैं
फिर भी ना आया लुटेरा|

रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|

कैसी ये जिन्दगी, के साँसों से हम ऊबे
के दिल डूबा, हम डूबे
एक दुखिया बेचारी, इस जीवन से हारी
उस पर ये गम का अन्धेरा|

रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******

4 responses to “रुला के गया, सपना मेरा!”

  1. This is my favourite song

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Very nice song.

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  2. मेरी पसंदीदा गीत |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      जी, वास्तव में बहुत प्यारा गीत है और बहुत सुंदर ढंग से फिल्माया गया है।

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