
होश अपना भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त,
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है|
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
A sky full of cotton beads like clouds

होश अपना भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त,
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है|
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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