चले जाते हैं अपनी धुन में!

हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में,
रास्ता है कि कहीं और चला जाता है|

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

2 responses to “चले जाते हैं अपनी धुन में!”

  1. वाह, बहुत खूब |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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