
बिसात-ए-इश्क पे बढ़ना किसे नहीं आता,
यह और बात कि बचने के घर नहीं आते|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

बिसात-ए-इश्क पे बढ़ना किसे नहीं आता,
यह और बात कि बचने के घर नहीं आते|
वसीम बरेलवी
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