कल भारतीय सिनेमा जगत के ‘सपनों के सौदागर’ राज कपूर जी का जन्म दिन था और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी की पुण्य तिथि भी थी| एक दिन देर से ही सही मैं उन दोनों महान हस्तियों का पुण्य स्मरण करता हूँ|

शैलेन्द्र जी को ‘तीसरी कसम’ बनाने की उनकी धुन ले बैठी थी और राज कपूर साहब भी अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेरा नाम जोकर’ की असफलता के बाद बरबाद हो गए थे| उन्होंने अपनी पूरी पूंजी इस फिल्म पर लगा दी थी और उस समय यह फिल्म नहीं चल पाई थी|
मैंने कहीं पढ़ा था कि इस फिल्म की असफलता के बाद राज कपूर नशे की हालत में ख्वाजा अहमद अब्बास जी के पास गए और कहा कि ‘मुझे अब आप ही बचा सकते हो’| अब्बास साहब ने तब ‘बॉबी’ की स्क्रिप्ट लिखकर दी, इस फिल्म में राज कपूर के दोस्त रहे ‘प्राण’ जी ने एक रुपये में काम करना स्वीकार कर लिया और कहा कि अगर अच्छी कमाई हो जाए तो मुझे मेरी फीस दे देना| इसमें एक बड़ी भूमिका राज कपूर के साले प्रेम नाथ जी ने की और हीरो के लिए राजेश खन्ना जैसे स्टार को लेने की स्थिति में राज कपूर नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपने बेटे ऋषि कपूर को यह रोल दिया और नई नवेली नायिका डिंपल कपाड़िया को इस फिल्म में लांच किया|
इस फिल्म ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता प्राप्त की और राज कपूर फिर से समृद्ध हो गए| लेकिन इस फिल्म के बाद राज कपूर ने प्राण जी को एक लाख का चेक भेजा, जिस पर प्राण नाराज हो गए क्योंकि वे तब इससे कहीं अधिक फीस लेते थे, और इसके बाद उनकी दोस्ती भी टूट गई थी|
खैर लीजिए प्रस्तुत है ‘मेरा नाम जोकर’ फिल्म के लिए नीरज जी का लिखा यह गीत जिसे शंकर जयकीशन की जोड़ी के मधुर संगीत में मेरे प्रिय गायक मुकेश जी ने गाया था –
कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हक़ीकत आधा फ़साना
चश्मा उतारो, फिर देखो यारो
दुनिया नयी है, चेहरा पुराना
कहता है जोकर …
धक्के पे धक्का, रेले पे रेला
है भीड़ इतनी पर दिल अकेला
ग़म जब सताये, सीटी बजाना
पर मसखरे से दिल न लगाना
कहता है जोकर …
अपने पे हँस के जग को हँसाया
बन के तमाशा मेले में आया
हिन्दु न मुस्लिम, पूरब न पश्चिम
मज़हब है अपना हँसना हँसाना
कहता है जोकर …
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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