
गर्मी-ए-मोहब्बत में वो है आह से माने,
पंखा नफ़स-ए-सर्द का झलने नहीं देते|
अकबर इलाहाबादी
A sky full of cotton beads like clouds

गर्मी-ए-मोहब्बत में वो है आह से माने,
पंखा नफ़स-ए-सर्द का झलने नहीं देते|
अकबर इलाहाबादी
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