आंख में पानी नहीं रहा!

इन बादलों की आंख में पानी नहीं रहा,
तन बेचती है भूख एक मुट्ठी धान में।

उदय प्रताप सिंह

2 responses to “आंख में पानी नहीं रहा!”

  1. बहुत मार्मिक /

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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