इस नगरी क्यूँ आये थे!

रुख़्सत के दिन भीगी आँखों उसका वो कहना हाए “क़तील”,
तुम को लौट ही जाना था तो इस नगरी क्यूँ आये थे|

क़तील शि
फ़ाई

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