मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए!

आज एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ ज़नाब कैफी आज़मी साहब की लिखी हुई, कैफी आज़मी साहब हमारे देश के जाने माने और मशहूर शायर रहे हैं और उनकी बहुत सी रचनाओं का फिल्मों में भी सदुपयोग किया गया है|


कैफी आज़मी साहब की इस ग़ज़ल को फिल्म ‘हँसते जख्म’ के लिए मदन मोहन जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने बड़े प्रभावी ढंग से गाया था|

लीजिए प्रस्तुत है कैफी आज़मी साहब की यह ग़ज़ल –

आज सोचा तो आँसू भर आए,
मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए|

हर कदम पर उधर मुड़ के देखा,
उनकी महफ़िल से हम उठ तो आए|

दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं,
याद इतना भी कोई न आए|

रह गई ज़िंदगी दर्द बनके,
दर्द दिल में छुपाए छुपाए|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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